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फर्स्ट, ब्रेक ऑल द रूल्स: वॉट द वर्ल्ड्स ग्रेटेस्ट मैनेजर्स डू डिफरेंटली
Focus on strengths rather than weaknesses Managers trump companies The Twelve Questions as a measuring stick for engagement

फर्स्ट, ब्रेक ऑल द रूल्स: वॉट द वर्ल्ड्स ग्रेटेस्ट मैनेजर्स डू डिफरेंटली

द्वारा मार्क्स बकिंघम और कर्ट कॉफमैन

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3m

भाषा

English

रेटिंग

4.5

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Non-Fiction

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फर्स्ट, ब्रेक ऑल द रूल्स: वॉट द वर्ल्ड्स ग्रेटेस्ट मैनेजर्स डू डिफरेंटली
मार्क्स बकिंघम और कर्ट कॉफमैन
English Hinduism

फर्स्ट, ब्रेक ऑल द रूल्स: वॉट द वर्ल्ड्स ग्रेटेस्ट मैनेजर्स डू डिफरेंटली

मार्क्स बकिंघम और कर्ट कॉफमैन
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Bhakti Yoga is a profound exploration of the path of devotion, presenting love, surrender, and spiritual discipline through the teachings of Swami Vivekananda.

इस पुस्तक के बारे में

यह पुस्तक विश्व के महान प्रबंधकों के कार्य करने के तरीकों पर आधारित है।

मुख्य अंतर्दृष्टि

सच्चाई यह है कि एक बेहतरीन मैनेजर अपने कर्मचारियों के साथ कभी भी एक जैसा व्यवहार नहीं करता। जबकि दुनिया हमें सिखाती है कि सबको ‘समान’ मौका देना या एक ही तराजू में तौलना सफलता की कुंजी है, हकीकत यह है कि महान प्रबंधक ठीक इसके उलट काम करते हैं। वे नियमों को तोड़ते हैं ताकि वे हर व्यक्ति की अनूठी प्रतिभा को पहचान सकें। मार्कस बकिंघम और कर्ट कॉफमैन की किताब “First, Break All the Rules: What the World’s Greatest Managers Do Differently” इसी विरोधाभास की कहानी है।

इस किताब का मूल मंत्र इतना सरल है कि एक 12 साल का बच्चा भी समझ ले: महान मैनेजर लोगों की कमजोरियों को सुधारने में समय बर्बाद नहीं करते, बल्कि उनकी खूबियों को तराशकर उन्हें चमकने का मौका देते हैं।

गैलप के 80,000 से अधिक प्रबंधकों पर किए गए विशाल अध्ययन के आधार पर, लेखक यह साबित करते हैं कि कर्मचारी कंपनी नहीं छोड़ते, वे अपने मैनेजर को छोड़ते हैं। बकिंघम और कॉफमैन लिखते हैं, “लोग बहुत ज्यादा नहीं बदलते। जो उनमें नहीं है, उसे डालने की कोशिश में अपना वक्त नष्ट न करें। जो पहले से मौजूद है, उसे बाहर निकालने की कोशिश करें।” यह वाक्य ही इस पूरी विचारधारा का सार है।

लेखकों का दावा है कि महान मैनेजर चार स्तंभों पर काम करते हैं: प्रतिभा को चुनना, सही परिणाम तय करना, ताकत पर ध्यान केंद्रित करना और सही भूमिका देना। वे तर्क देते हैं कि मैनेजर को एक ‘कैटालिस्ट’ यानी उत्प्रेरक की तरह काम करना चाहिए, जो कर्मचारी की छिपी हुई ऊर्जा को कंपनी के लक्ष्यों के साथ जोड़ दे।

कुछ आलोचक कहते हैं कि यह दृष्टिकोण बहुत व्यक्तिवादी है, लेकिन लेखक स्पष्ट करते हैं कि एक जैसा व्यवहार करना न्याय नहीं, बल्कि आलस है। महान प्रबंधकों को पता है कि हर इंसान का ‘बेस कैंप’ अलग होता है। क्या आपके पास काम के लिए सही सामग्री है? क्या कोई आपकी परवाह करता है? [sigh]

क्या आप भी अपनी छिपी हुई प्रतिभा को उस भूमिका में ढालने के लिए तैयार हैं जहाँ आप सबसे बेहतर प्रदर्शन कर सकें? इस किताब के पन्नों में मैनेजमेंट का वो सच छिपा है, जो आपकी पूरी कार्य-संस्कृति को बदल सकता है। आखिर, महान मैनेजर लोगों को सुधारते नहीं, उन्हें निखारते हैं।

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