स्मार्टर फास्टर बेटर: द सीक्रेट्स ऑफ बीइंग प्रोडक्टिव इन लाइफ एंड बिजनेस
द्वारा चार्ल्स डुहिग
स्मार्टर फास्टर बेटर: द सीक्रेट्स ऑफ बीइंग प्रोडक्टिव इन लाइफ एंड बिजनेस
Bhakti Yoga is a profound exploration of the path of devotion, presenting love, surrender, and spiritual discipline through the teachings of Swami Vivekananda.
इस पुस्तक के बारे में
उत्पादकता के विज्ञान में एक गहरा गोता, उन आदतों और संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं की खोज करना जो व्यक्तियों और संगठनों को निर्णय लेने, लक्ष्य निर्धारण पर ध्यान केंद्रित करके अधिक प्रभावी ढंग से काम करने की अनुमति देती हैं।
मुख्य अंतर्दृष्टि
उत्पादकता के पारंपरिक विचार कि “अधिक काम करना ही सफलता है” को ‘Smarter Faster Better: The Secrets of Being Productive in Life and Business’ ने हमेशा के लिए बदल दिया है। चार्ल्स डुहिंग की यह कृति बताती है कि उत्पादकता का संबंध कड़ी मेहनत से नहीं, बल्कि उन विशिष्ट निर्णयों से है जो हमारे सोचने के तरीके को बदल देते हैं। एक 12 साल के बच्चे के शब्दों में कहें तो: उत्पादकता का अर्थ अधिक काम करना नहीं, बल्कि चतुर चुनाव करना है।
चार्ल्स डुहिंग, जो एक खोजी पत्रकार हैं, ने यह पुस्तक इसलिए लिखी क्योंकि वे उन मनोवैज्ञानिक रहस्यों को समझना चाहते थे जो असाधारण लोगों को दूसरों से अलग करते हैं। वह कहते हैं, “नवाचार कोई अचानक चमकने वाली बिजली नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित प्रक्रिया है।” वे डिज्नी की फिल्म ‘फ्रोजन’ का उदाहरण देते हैं, जहाँ ‘रचनात्मक निराशा’ ने टीम को घिसे-पिटे विचारों से बाहर निकलने पर मजबूर किया।
डुहिंग एक और महत्वपूर्ण बात कहते हैं, “डेटा तब तक बेकार है जब तक उसे समझने योग्य ढांचों में न बदला जाए।” आज की सूचनाओं से भरी दुनिया में, हम ‘इंफॉर्मेशन ब्लाइंडनेस’ यानी सूचनाओं के जाल में फंस जाते हैं। वे ‘डिसफ्लुएंसी’ (disfluency) या जानबूझकर सीखने की प्रक्रिया को कठिन बनाने की वकालत करते हैं। जब हम डेटा को केवल स्क्रीन पर देखने के बजाय अपने हाथों से लिखते या व्यवस्थित करते हैं, तब हमारा मस्तिष्क उसे गहराई से समझ पाता है।
आलोचक यह कह सकते हैं कि आधुनिक युग में ‘धीमा’ या ‘मैनुअल’ होना अव्यावहारिक है, लेकिन चार्ल्स डुहिंग का तर्क है कि यही ‘घर्षण’ हमें निष्क्रियता से बचाकर सक्रिय समाधानों की ओर ले जाता है।
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इस पुस्तक का मूल यही है: हम तब स्मार्ट और तेज बनते हैं जब हम सक्रिय रूप से अपने विचारों और सूचनाओं के साथ जुड़ते हैं, न कि उन्हें केवल passively ग्रहण करते हैं। क्या आप जानना चाहते हैं कि आपकी अपनी सोच के कौन से ढाँचे आपको आगे बढ़ने से रोक रहे हैं? उत्पादकता का अर्थ अधिक काम करना नहीं, बल्कि चतुर चुनाव करना है। [sigh] इस यात्रा को पूरा जानने के लिए यह पुस्तक जरूर पढ़ें।