धरती अभी घूमती है
द्वारा रांगेय राघव
धरती अभी घूमती है
Bhakti Yoga is a profound exploration of the path of devotion, presenting love, surrender, and spiritual discipline through the teachings of Swami Vivekananda.
इस पुस्तक के बारे में
धरती अभी घूमती है रांगेय राघव का एक महत्वपूर्ण हिंदी उपन्यास है, जो राजस्थान, भारत में खानाबदोश और विमुक्त जनजातियों की कठोर वास्तविकताओं को दर्शाता है। यह 1955 में प्रकाशित हुआ था।
मुख्य अंतर्दृष्टि
लाल सिंह अपनी फटी हुई चादर को कसकर लपेटे हुए, राजस्थान की तपती रेत पर खड़ा है। उसके चारों ओर का सन्नाटा ऐसा है जैसे हवा भी डरकर थम गई हो। वह एक खानाबदोश है, जिसका घर कोई एक जगह नहीं, बल्कि यह अंतहीन रास्ता है। लेकिन आज, पुलिस की भारी जूतों की आहट उसकी दुनिया को कुचलने के लिए तैयार है। वह बस इतना चाहता है कि उसका परिवार रात की ठंड से बच जाए, मगर सिस्टम उसे अपराधी मानता है। उसके सीने में दबी कसक साफ़ सुनाई देती है—क्या अपनी ही धरती पर जीने का हक़ मांगना इतना बड़ा गुनाह है?
रंगेय राघव की कालजयी कृति “Dharti Abhi Ghumti Hai” सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि हाशिए पर खड़े उन लोगों का दस्तावेज़ है जिन्हें इतिहास ने अक्सर भुला दिया है। लेखक ने उस दृश्य को बड़ी बारीकी से गढ़ा है जहाँ लाल सिंह और एक सरकारी अधिकारी के बीच तकरार होती है। वहां का दृश्य कुछ ऐसा है—धूप की चुभन आँखों को मींचने पर मजबूर करती है, और पास ही सुलगते चूल्हे से उठता धुआँ हवा में एक अजीब सी उदासी घोल रहा है।
वहाँ एक संवाद है जिसे कोई नहीं भूल सकता। अधिकारी पूछता है, “तुम्हारे पास कोई ज़मीन के कागज़ हैं?” लाल सिंह ठंडी आह भरकर कहता है, “साहब, आसमान को कागज़ों में बाँधना हमने नहीं सीखा, बस उसके नीचे सोना सीखा है।” [short pause]
रंगेय राघव का लेखन पत्थर को भी पिघला देने की क्षमता रखता है। वे लिखते हैं, “इंसान की नियति वही है, जो उसके पैरों के नीचे की धूल तय करती है।” यह किताब समाज के उस नंगे सच को सामने लाती है जहाँ विकास की चकाचौंध के पीछे किसी का पूरा वजूद मिटा दिया जाता है। [sigh]
क्या लाल सिंह का परिवार अपनी पहचान बचा पाएगा? या समय का पहिया उन्हें भी कुचल देगा? यह उपन्यास हमें सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर न्याय का असली चेहरा क्या है। इस संघर्ष को अंत तक जानने के लिए, “Dharti Abhi Ghumti Hai” का हर पन्ना पढ़ना ज़रूरी है। क्या धरती वाकई घूमती है, या हम बस एक ही जगह टिके रह गए हैं?