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द फोर एग्रीमेंट्स
Mindfulness and Presence Personal Freedom Self-mastery

द फोर एग्रीमेंट्स

द्वारा डॉन मिगुएल रुइज़

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भाषा

English

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4.5

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Non-Fiction

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द फोर एग्रीमेंट्स
डॉन मिगुएल रुइज़
English Hinduism

द फोर एग्रीमेंट्स

डॉन मिगुएल रुइज़
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Bhakti Yoga is a profound exploration of the path of devotion, presenting love, surrender, and spiritual discipline through the teachings of Swami Vivekananda.

इस पुस्तक के बारे में

द फोर एग्रीमेंट्स प्राचीन टॉल्टेक ज्ञान पर आधारित आचरण की एक संहिता प्रदान करता है जो आत्म-सीमित मान्यताओं से व्यक्तिगत स्वतंत्रता की वकालत करता है। चार परिवर्तनकारी समझौतों को अपनाकर – त्रुटिहीन बनें।

मुख्य अंतर्दृष्टि

कल्पना कीजिए एक ऐसे व्यक्ति की, जो अपने ही मन के भीतर एक ऐसी अदालत में कैद है जहाँ उसे हर पल खुद को दोषी साबित करना पड़ता है। यह व्यक्ति बचपन से ही समाज, परिवार और परंपराओं के उन नियमों को ढो रहा है, जो उसने कभी चुने ही नहीं थे। वह बस खुश रहना चाहता है, लेकिन डर और आत्म-संदेह की बेड़ियां उसे सांस भी नहीं लेने देतीं।

डॉन मिगुएल रुइज़ की पुस्तक “The Four Agreements” इसी कैद से आज़ादी का रास्ता दिखाती है। रुइज़ का मूल मंत्र सीधा है: आपकी पूरी जिंदगी उन समझौतों का परिणाम है जो आपने अपने साथ किए हैं, और आप उन्हें आज बदल सकते हैं।

रुइज़ एक कुशल सर्जन रहे हैं, जिनका जीवन एक कार दुर्घटना के बाद पूरी तरह बदल गया। उन्होंने प्राचीन टोलटेक ज्ञान की गहराई में उतरकर इंसानी दुखों का स्रोत खोजा। वे तर्क देते हैं कि हम सभी एक ‘सपनों की दुनिया’ में जी रहे हैं, जहाँ ‘जज’ यानी हमारा आंतरिक आलोचक हमें हमेशा नीचा दिखाता है। लेखक का एक महत्वपूर्ण कथन है: “अपने शब्दों के प्रति दोषमुक्त रहें।” इसका अर्थ है—अपने शब्दों को जहर न बनने दें; न दूसरों के लिए, और न ही खुद के लिए।

कुछ लोग तर्क देते हैं कि समाज के नियमों को अनदेखा करना अव्यावहारिक है। लेकिन रुइज़ का कहना है कि यह नियमों को तोड़ना नहीं, बल्कि आत्म-हानि वाले समझौतों को त्यागकर सत्य को चुनना है। उन्होंने चार सरल सूत्र दिए हैं: अपनी बातों में अखंडता रखना, किसी बात को व्यक्तिगत न लेना, कोई भी पूर्वधारणा न बनाना, और हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ देना। [short pause]

क्या आप अपनी उस काल्पनिक अदालत को बंद करने के लिए तैयार हैं? जब आप अपने आप को उन पुरानी बेड़ियों से आज़ाद करते हैं, तो आप केवल एक बेहतर इंसान नहीं बनते, बल्कि आप उस ‘स्वर्ग’ को धरती पर उतार लाते हैं, जिसकी तलाश में हर कोई भटक रहा है। आप अब और खुद के दुश्मन नहीं रहेंगे। क्या आप जानना चाहेंगे कि वह चौथा समझौता आपकी पूरी दिनचर्या को कैसे बदल सकता है?

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