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एक रात कॉल सेंटर में

एक रात कॉल सेंटर में

द्वारा चेतन भगत

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2m

भाषा

English

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4.5

महत्व

Fiction

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एक रात कॉल सेंटर में
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एक रात कॉल सेंटर में
चेतन भगत
English Hinduism

एक रात कॉल सेंटर में

चेतन भगत
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Bhakti Yoga is a profound exploration of the path of devotion, presenting love, surrender, and spiritual discipline through the teachings of Swami Vivekananda.

इस पुस्तक के बारे में

यह कहानी गुड़गांव के कनेक्शन्स कॉल सेंटर में काम करने वाले छह दोस्तों की है। उन्हें भगवान से एक अप्रत्याशित फोन कॉल आता है, जो उनकी जिंदगी बदल देता है।

मुख्य अंतर्दृष्टि

“One Night @ the Call Center” ने भारतीय साहित्य की दिशा बदल दी, क्योंकि इसने कॉर्पोरेट दफ्तरों की कृत्रिम रोशनी और मशीनी जीवन के पीछे छिपे उस शोर को पहली बार सबके सामने ला खड़ा किया जिसे हम अक्सर अनसुना कर देते हैं। चेतन भगत ने हमें दिखाया कि कैसे आधुनिकता की दौड़ में हम अपनी रूह को पीछे छोड़ आते हैं।

कहानी गुड़गांव के ‘कनेक्शन्स’ कॉल सेंटर की है, जहाँ की हवा में ठंडी एसी की गंध और कॉफी के कड़वेपन के साथ-साथ असफलता का डर घुला हुआ है। रात के सन्नाटे में छह सहकर्मी बैठे हैं—शाम, प्रियंका, वरुम, ईशा, राधिका और मिलिट्री अंकल। [short pause] बाहर बारिश की फुहारें हैं, दफ्तर की लाइटें टिमटिमा रही हैं और अचानक, फोन की एक घंटी सब कुछ बदल देती है। उस फोन के दूसरी तरफ कोई और नहीं, खुद ईश्वर हैं।

एक ऐसा दृश्य जो दिल में घर कर जाता है, जब शाम और प्रियंका एक-दूसरे के आमने-सामने होते हैं। चेतन भगत ने लिखा है, “सच्चाई कड़वी है, लेकिन झूठ से ज्यादा सुकून देती है।” प्रियंका का अंतर्मन तड़प रहा है—वह अपने परिवार की मर्जी के आगे घुटने टेकना नहीं चाहती, लेकिन समाज के दबाव में उसकी आवाज दबी हुई है।

चेतन भगत का लेखन बेबाक है। वे कॉर्पोरेट दुनिया की उस क्रूरता को बेनकाब करते हैं जहाँ इंसान सिर्फ एक ‘रिसोर्स’ बन कर रह गया है। यहाँ की असली बहस सिर्फ भगवान के फोन की नहीं है, बल्कि उस ‘इनर कॉल’ की है जिसे हम बाहरी शोर में दबा देते हैं। यह किताब पूछती है—क्या तुम वही जीवन जी रहे हो जो तुम जीना चाहते थे, या तुम सिर्फ किसी और की बनाई स्क्रिप्ट पढ़ रहे हो?

जब वरुम अपने बॉस बख्शी के खिलाफ आवाज उठाता है, तो वह केवल एक नौकरी बचाने की लड़ाई नहीं है, बल्कि अपने वजूद को वापस पाने की जिद है। क्या ये छह लोग उस रात के बाद खुद को बदल पाएंगे? या फिर अगली सुबह की पहली किरण के साथ वे वापस उसी बेरहम भीड़ का हिस्सा बन जाएंगे? जवाब के लिए, आपको उस आखिरी कॉल का इंतजार करना होगा।

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