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सेई समय (वो दिन)

सेई समय (वो दिन)

द्वारा सुनील गंगोपाध्याय

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3m

भाषा

Bengali

रेटिंग

4.5

महत्व

Fiction

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सेई समय (वो दिन)
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सेई समय (वो दिन)
सुनील गंगोपाध्याय
English Hinduism

सेई समय (वो दिन)

सुनील गंगोपाध्याय
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Bhakti Yoga is a profound exploration of the path of devotion, presenting love, surrender, and spiritual discipline through the teachings of Swami Vivekananda.

इस पुस्तक के बारे में

सेई समय, या वो दिन, सुनील गंगोपाध्याय का एक ऐतिहासिक उपन्यास है जो 19वीं सदी के कलकत्ता में बंगाल पुनर्जागरण के दौरान सेट है। उपन्यास ऐतिहासिक और काल्पनिक किरदारों के जीवन को बुनता है।

मुख्य अंतर्दृष्टि

‘Sei Samay’ केवल एक उपन्यास नहीं है, यह उन्नीसवीं सदी के बंगाल के उस पुनर्जागरण काल का जीवंत दस्तावेज है जिसने आधुनिक भारत की आधारशिला रखी। सुनील गंगोपाध्याय ने इस कालखंड को महज इतिहास के पन्नों से नहीं निकाला, बल्कि उसे मानवीय रक्त और मांस के साथ पुनर्जीवित किया है।

कलकत्ता की एक शाम। हवा में गंगा के पानी की सीलन और मशालों के धुएं की गंध घुली हुई है। [short pause] ईश्वरचंद्र विद्यासागर एक संकीर्ण कमरे में बैठे हैं, जहां तेल के दीये की कांपती रोशनी उनके माथे की सिलवटों को गहरा कर रही है। बाहर से आती घोड़ा-गाड़ियों की आवाज़ें एक ऐसे युग का शोर हैं जो पुरानी परंपराओं को तोड़कर आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है।

सुनील गंगोपाध्याय की कलम का जादू देखिए, जहाँ वे लिखते हैं: “इतिहास केवल राजाओं का नहीं, उन संघर्षों का नाम है जो चुपचाप एक साधारण व्यक्ति के भीतर रचे जाते हैं।”

मुझे वह दृश्य आज भी याद है जब माइकल मधुसूदन दत्त और उनके मित्रों के बीच बहस होती है। माइकल कहते हैं, “क्या हम अपनी भाषा को त्यागकर ही प्रगति करेंगे?” दूसरा स्वर आता है, “नहीं, हम उसे आधुनिकता की कसौटी पर परखेंगे।” यह संवाद केवल शब्दों का आदान-प्रदान नहीं है; यह एक सभ्यता का आत्ममंथन है। [medium pause]

इस पुस्तक का मूल तर्क यह है कि कोई भी महान परिवर्तन बिना गहरे व्यक्तिगत दर्द और सामाजिक अलगाव के संभव नहीं है। पात्रों के भीतर एक निरंतर डर है—कि कहीं वे अपनी जड़ें न खो दें, और एक तड़प है—कि वे समय से आगे निकल जाएं।

सुनील गंगोपाध्याय की भाषा में वह प्रवाह है जो पाठक को बहा ले जाता है। [sigh] ‘Sei Samay’ हमें उस मोड़ पर खड़ा कर देती है जहाँ परंपराएं टूट रही थीं और नए सपने जन्म ले रहे थे। क्या मनुष्य वास्तव में अपने समय का गुलाम है, या वह समय को बदलने की शक्ति रखता है? यह सवाल इस पूरे सफर में आपके साथ बना रहेगा। इसे पढ़ना एक अनुभव है, जिसे भूलना असंभव है।

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