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झेरना

झेरना

द्वारा रमणभाई महिपात्रम नीलकंठ

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3m

भाषा

Gujarati

रेटिंग

4.5

महत्व

Fiction

AI द्वारा वाचन
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रमणभाई महिपात्रम नीलकंठ
English Hinduism

झेरना

रमणभाई महिपात्रम नीलकंठ
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Bhakti Yoga is a profound exploration of the path of devotion, presenting love, surrender, and spiritual discipline through the teachings of Swami Vivekananda.

इस पुस्तक के बारे में

20वीं सदी की शुरुआत में सामाजिक सुधार, शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति और महिलाओं की स्वायत्तता के संघर्ष के विषयों की पड़ताल करने वाला एक अग्रणी गुजराती उपन्यास।

मुख्य अंतर्दृष्टि

कमरे में जलते दीये की लौ दीवार पर लंबी, कांपती हुई परछाइयां बना रही है। हवा में पुरानी किताबों की धूल और बंद दरवाजों की घुटन भरी सिलन है। एक विधवा स्त्री, जिसके सफेद वस्त्र उसकी नियति की तरह कठोर हैं, खिड़की के बाहर शून्य में देख रही है। बाहर की दुनिया बदल रही है, पर उसके भीतर का संसार सदियों पुरानी बेड़ियों में जकड़ा है। [short pause] यह दृश्य रमनभाई महीपतराम नीलकंठ की कालजयी रचना “Jherna” का हृदय है।

यह कहानी केवल समाज सुधार का एक दस्तावेज नहीं, बल्कि उस दर्द का बयां है जो परंपराओं के नाम पर महिलाओं की आत्मा पर चस्पा किया गया। रमनभाई महीपतराम नीलकंठ ने विधवाओं की उस पीड़ा को शब्दों में पिरोया है, जिसे उस दौर का समाज अक्सर अनदेखा कर देता था। एक दृश्य में, जब मुख्य नायिका शिक्षा की अलख जगाने की बात करती है, तो रूढ़िवादी बुजुर्ग का स्वर गूँजता है: “धर्म की मर्यादाओं को तोड़कर तुम क्या हासिल कर लोगी?” नायिका का उत्तर आता है, “मर्यादाएं वहां खत्म हो जाती हैं जहाँ मानवता का गला घोंटा जाए।” [sigh]

उनके लेखन की खूबी यह है कि वे उपदेश नहीं देते, बल्कि पात्रों के भीतर के द्वंद्व को कुरेदते हैं। नायिका का आंतरिक भय यह है कि कहीं उसका साहस उसके अपने ही लोगों को उससे दूर न कर दे, फिर भी उसकी खोज उस रोशनी की है जो ज्ञान से आती है। रमनभाई का गद्य कमाल का है, जहाँ वे लिखते हैं: “परिवर्तन का मार्ग कांटों से भरा है, किंतु उसी मार्ग पर चलकर ही फूल खिलते हैं।”

“Jherna” का मूल मंतव्य समाज की उस संकीर्णता पर प्रहार करना है, जो योग्यता से पहले लिंग को देखती है। यह पुस्तक पूछती है कि क्या प्रेम और अधिकार केवल भाग्य के भरोसे छोड़े जाने चाहिए, या उन्हें छीना जाना चाहिए? यदि आप एक ऐसी यात्रा पर निकलना चाहते हैं जो दिल को झकझोर दे और समाज को आईना दिखाए, तो “Jherna” को पूरा पढ़ना अनिवार्य है। [uhm] क्या अंत में वे बेड़ियां टूटेंगी या समाज का दबाव और गहरा हो जाएगा? इसका उत्तर उन पन्नों के भीतर छिपा है।

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