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चाणक्य का मंत्र
Political Manipulation

चाणक्य का मंत्र

द्वारा अश्विन सांघी

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2m

भाषा

English

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4.5

महत्व

Fiction

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चाणक्य का मंत्र
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चाणक्य का मंत्र
अश्विन सांघी
English Hinduism

चाणक्य का मंत्र

अश्विन सांघी
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Bhakti Yoga is a profound exploration of the path of devotion, presenting love, surrender, and spiritual discipline through the teachings of Swami Vivekananda.

इस पुस्तक के बारे में

यह एक रोमांचक दोहरी-कथा वाला उपन्यास है जो प्राचीन भारतीय रणनीतिकार चाणक्य के जीवन और एक समकालीन राजनीतिक हेरफेर को एक साथ बुनता है।

मुख्य अंतर्दृष्टि

क्या आप जानते हैं कि कौटिल्य का अर्थशास्त्र आज भी भारत की राजनीति की धड़कन है, लेकिन इसकी असलियत प्राचीन ग्रंथों के धूल भरे पन्नों से कहीं ज्यादा खतरनाक है? अश्विन सांघी की पुस्तक “Chanakya’s Chant” इसी सच को एक रोमांचक सफर में बदल देती है। यह केवल एक किताब नहीं, बल्कि सत्ता की उस शतरंज का खुलासा है जो सदियों से एक ही नियम पर चल रही है।

कहानी दो युगों के बीच झूलती है। एक तरफ प्राचीन भारत में चाणक्य का अपमानित होना और मगध के नंद वंश को उखाड़ फेंकने का उनका अटूट संकल्प है। वहीं दूसरी तरफ, वर्तमान के कानपुर में इतिहास के प्रोफेसर पंडित गंगासागर मिश्र हैं, जो आधुनिक राजनीति के पर्दे के पीछे से अपनी कठपुतलियों को नचाते हैं।

एक दृश्य देखिए जो रोंगटे खड़े कर देता है। कमरे में चमेली के तेल की भीनी खुशबू है। बाहर बारिश की बूंदें खिड़की से टकरा रही हैं, लेकिन अंदर पंडित गंगासागर मिश्र की आँखों में सन्नाटा है। [short pause] वे अपनी शिष्या चांदनी गुप्ता की ओर देखते हुए कहते हैं, “राजनीति में नैतिकता एक ऐसा गहना है जिसे तुम तब पहनती हो जब तुम्हारे पास खोने के लिए कुछ न हो।” यह सुनते ही चांदनी के भीतर का डर और महत्वाकांक्षा आपस में टकराने लगते हैं। उसे एहसास होता है कि सत्ता का रास्ता सिंहासन तक नहीं, बल्कि लाशों के ढेर से होकर गुजरता है।

अश्विन सांघी की लेखनी का जादू देखिए, वे लिखते हैं, “इतिहास खुद को नहीं दोहराता, बल्कि इंसान की भूख हर युग में एक जैसी ही रहती है।” यह पुस्तक आपको सिखाती है कि कैसे ‘चाणक्य नीति’ आज भी मीडिया, वोट बैंक और कॉर्पोरेट जगत के खेल में हथियार की तरह इस्तेमाल हो रही है।

सत्ता, धोखा और बदले की यह चक्रवात जैसी कहानी आपको इस सवाल पर लाकर छोड़ देगी: क्या हम सच में आजाद हैं, या हम भी किसी पंडित गंगासागर मिश्र की बिछाई हुई बिसात का महज एक प्यादा हैं? आगे क्या होगा, यह जानने की आपकी बेचैनी ही इस किताब की सबसे बड़ी जीत है।

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