और फिर कोई नहीं बचा
द्वारा अगाथा क्रिस्टी
और फिर कोई नहीं बचा
Bhakti Yoga is a profound exploration of the path of devotion, presenting love, surrender, and spiritual discipline through the teachings of Swami Vivekananda.
इस पुस्तक के बारे में
एक रहस्यमय मेज़बान द्वारा दस अजनबियों को एक द्वीप पर आमंत्रित किया जाता है, जहाँ उन्हें उनके पिछले अपराधों के लिए एक-एक करके मार दिया जाता है।
मुख्य अंतर्दृष्टि
अगाथा क्रिस्टी ने अपनी इस कालजयी रचना “And Then There Were None” को लिखने के लिए इतना अधिक संघर्ष किया था कि उन्होंने खुद स्वीकार किया था कि यह उनके पूरे करियर की सबसे कठिन किताब थी। वे एक ऐसी कहानी बुनना चाहती थीं जिसमें दस लोग एक द्वीप पर हों और एक-एक करके मरें, बिना किसी स्पष्ट कातिल के—एक ऐसा पहेलीनुमा ताना-बाना जिसे सुलझाना नामुमकिन सा लगे।
कल्पना कीजिए, डेवोन के तट से दूर एक वीरान द्वीप। हवा में नमक की गंध है और लहरों का शोर चट्टानों से टकराकर एक भयावह संगीत पैदा कर रहा है। खाने की मेज पर दस चीनी की मूर्तियाँ सजी हैं। अचानक, कमरा एक ठंडी खामोशी से भर जाता है। ग्रामोफोन पर बजने वाली एक कर्कश आवाज उन सभी दस अजनबियों के अतीत के उन पापों को उजागर करती है, जिन्हें वे दुनिया से छुपाए बैठे थे। [short pause] डर की एक लहर कमरे में दौड़ जाती है।
वहाँ एक दृश्य है जिसे पाठक कभी नहीं भूल सकते। वेरा क्लेथॉर्न का कांपता हुआ हाथ और फिलिप लोम्बार्ड की वह ठंडी, चुभती हुई मुस्कान। लोम्बार्ड कहता है, “आखिर हम सब यहाँ मौत के जाल में क्यों फंसे हैं?” और वेरा जवाब देती है, “क्योंकि हमने जो किया, उसका हिसाब अब हमें ही चुकाना होगा।”
अगाथा क्रिस्टी का लेखन कौशल यहाँ अपनी पराकाष्ठा पर है। वे लिखती हैं, “द्वीप पर सन्नाटा इतना गहरा था कि वह किसी की धड़कन सुनने की कोशिश करता हुआ महसूस होता था।” यह किताब सिर्फ एक मर्डर मिस्ट्री नहीं है; यह मानवीय नैतिकता का नग्न सच है। यह दिखाती है कि जब कानून नाकाम हो जाता है, तो न्याय का मुखौटा पहनकर एक इंसान क्या कुछ नहीं कर सकता। [sigh] यह कहानी अंत तक आपको यह सोचने पर मजबूर कर देगी—क्या न्याय का मतलब सिर्फ सजा देना है, या खुद न्याय करने वाला बन जाना?
अंत क्या है? क्या वाकई कोई कातिल है, या द्वीप खुद ही एक सजा है? “And Then There Were None” के हर पन्ने के साथ रहस्य गहराता जाता है। जब आखिरी मूर्ति गायब होगी, तब आप भी अपनी सांसें थाम लेंगे।