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द साइंस ऑफ गेटिंग रिच
Efficient Action The Creative vs. The Competitive Plane The Formless Substance The Power of Thought and Vision

द साइंस ऑफ गेटिंग रिच

द्वारा Wallace D. Wattles

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English

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Non-Fiction

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Wallace D. Wattles
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द साइंस ऑफ गेटिंग रिच

Wallace D. Wattles
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Bhakti Yoga is a profound exploration of the path of devotion, presenting love, surrender, and spiritual discipline through the teachings of Swami Vivekananda.

इस पुस्तक के बारे में

The Science of Getting Rich is a foundational New Thought text that argues wealth creation is an exact science governed by natural laws. It posits that by adopting a ‘creative’ rather than ‘competitive’ mindset, maintaining unwavering faith, practicing constant gratitude, and acting in a ‘Certain Way,’ individuals can manifest financial abundance with mathematical certainty.

मुख्य अंतर्दृष्टि

कल्पना कीजिए कि एक ऐसी दुनिया है जहाँ अमीरी किस्मत या कठिन परिस्थितियों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि गणित के किसी सूत्र की तरह निश्चित है। अगर अमीर बनना एक विज्ञान है, तो क्या आप उसे सीखने के लिए तैयार हैं?

वॉरलेस डी. वॉटल्स की किताब, The Science of Getting Rich, इसी विचार पर टिकी है। इसका मुख्य सार इतना सरल है कि एक 12 साल का बच्चा भी समझ ले: अमीर बनना कोई तुक्का नहीं है, बल्कि एक निश्चित तरीके से सोचने और काम करने का परिणाम है।

वॉटल्स खुद एक दार्शनिक थे, जिन्होंने जीवन भर गरीबी और अभावों को करीब से देखा था। उनकी प्रेरणा इसी अभाव को दूर करने की इच्छा से उपजी थी। वे तर्क देते हैं कि ब्रह्मांड एक ऐसी ऊर्जा से बना है जो हमारे विचारों के प्रति संवेदनशील है। वे लिखते हैं, “विचार ही वह इकलौती शक्ति है जो निराकार पदार्थ से मूर्त धन पैदा कर सकती है।” इसका मतलब है कि जब आप स्पष्ट इरादे के साथ कुछ सोचते हैं, तो ब्रह्मांड उसे हकीकत बनाने की ओर मुड़ जाता है।

वॉटल्स ने यहाँ ‘प्रतिस्पर्धा’ और ‘सृजन’ के बीच का अंतर समझाया है। प्रतिस्पर्धा आपको दूसरों से छीनने की ओर ले जाती है, जबकि सृजन की मानसिक स्थिति आपको असीमित संसाधनों से जोड़ती है। [uhm] एक मुख्य दावा वे यह करते हैं कि केवल कड़ी मेहनत ही काफी नहीं है, बल्कि हर छोटे काम को एक ‘सटीक तरीके’ से करना ही सफलता की कुंजी है।

आलोचक अक्सर पूछते हैं कि क्या मात्र सोचने से सब कुछ मिल सकता है? वॉटल्स इसका जवाब देते हुए कहते हैं कि विचार को ‘कार्रवाई’ का साथ मिलना ही चाहिए। वे स्पष्ट करते हैं कि आपका हर काम वर्तमान में, पूरी एकाग्रता के साथ होना चाहिए।

एक जगह वे लिखते हैं, “कृतज्ञता आपके मन को ब्रह्मांड की शक्ति के साथ तालमेल में रखती है।” यह किताब सिखाती है कि कैसे शिकायत छोड़कर केवल विकास के बारे में सोचा जाए। अंत में, यह किताब आपको सिखाती है कि अमीर बनना न केवल आपका अधिकार है, बल्कि एक नैतिक जिम्मेदारी भी है। क्या आप भी उस ‘सटीक तरीके’ को जानने के लिए तैयार हैं जो आपकी किस्मत बदल सकता है?

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