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भगवत गीता सम्पूर्ण
Bhagavad Gita foundations Biography and divinity of Lord Krishna Devotional practice and spiritual etiquette Existential philosophy and karma Iconography and nomenclature of the divine

भगवत गीता सम्पूर्ण

द्वारा राधा माधव दास

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English

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Non-Fiction

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भगवत गीता सम्पूर्ण
राधा माधव दास
English Hinduism

भगवत गीता सम्पूर्ण

राधा माधव दास
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Bhakti Yoga is a profound exploration of the path of devotion, presenting love, surrender, and spiritual discipline through the teachings of Swami Vivekananda.

इस पुस्तक के बारे में

यह 10 भागों वाली शिक्षाशास्त्रीय श्रृंखला भगवत गीता के लिए एक परिचयात्मक मार्गदर्शिका के रूप में काम करती है। यह भगवान कृष्ण पर मूलभूत संदर्भ, जीवनी संबंधी जानकारी और शुरुआती लोगों के लिए व्यावहारिक आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करता है।

मुख्य अंतर्दृष्टि

जब कुरुक्षेत्र के युद्ध के मैदान में अर्जुन का गांडीव हाथ से छूटने लगा और चारों ओर केवल विषाद और भटकाव था, तब श्री कृष्ण का वह मधुर संवाद ही था जिसने एक योद्धा को धर्म के मार्ग पर पुनः खड़ा किया। यह बोध, यह स्पष्टता और वह अलौकिक साहस, आज भी हर मनुष्य के भीतर एक युद्ध छिड़ने पर उसे दिशा देने की क्षमता रखता है।

राधा माधव दास की कृति “Bhagwat Geeta Sampoorn” केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शिका है। यह सरल शब्दों में हमें बताती है कि जीवन की हर उलझन, हर द्वंद्व और हर अनिश्चितता का उत्तर ‘भगवद गीता’ के भीतर समाहित है। इस पूरे सार का एक ही मूल मंत्र है—भगवद गीता वह जीवित ज्ञान है जो मनुष्य को उसके अस्तित्व और ईश्वर के साथ उसके शाश्वत संबंधों का बोध कराता है।

लेखक राधा माधव दास, जो स्वयं गहन भक्ति और अध्ययन के धनी हैं, यहाँ श्री कृष्ण के जीवन के उन पहलुओं को उजागर करते हैं जो अक्सर अनछुए रह जाते हैं। वे लिखते हैं, “श्री कृष्ण का जीवन मात्र लीला नहीं, बल्कि एक संपूर्ण जीवन दर्शन है जो हमें कर्तव्य और वैराग्य का संतुलन सिखाता है।” यह वाक्य इस बात का प्रमाण है कि कैसे एक दिव्य व्यक्तित्व को समझकर हम अपनी जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। [short pause]

राधा माधव दास ने इस श्रृंखला में प्रमाणों और तथ्यों का सुंदर समन्वय किया है। वे बताते हैं कि कैसे 5,154 वर्ष पूर्व का वह संवाद आज भी वैज्ञानिक रूप से प्रासंगिक है। आलोचक अक्सर प्रश्न उठाते हैं कि क्या प्राचीन ग्रंथों का आधुनिक जीवन में कोई स्थान है? इसका उत्तर लेखक यह देकर देते हैं कि गीता कोई सिद्धांत नहीं, बल्कि एक ‘उपयोगकर्ता मैनुअल’ है—यानी जीवन जीने का सही तरीका। [sigh]

वे स्पष्ट करते हैं कि भक्ति का अर्थ केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि मन की शुद्धि और एकाग्रता है। जब वे कृष्ण के अस्त्रों, उनके बाल जीवन और द्वारकाधीश के रूप में उनकी रणनीतियों का वर्णन करते हैं, तो पाठक को एक अद्भुत आत्मीयता महसूस होती है।

क्या आप तैयार हैं अपने भीतर के कुरुक्षेत्र को शांत करने के लिए? “Bhagwat Geeta Sampoorn” आपको उस दिशा में ले जाएगी। क्या आप उस ज्ञान के लिए तैयार हैं जो अर्जुन को मिला था?

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