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तमस (अंधकार)
Political Manipulation Social Injustice

तमस (अंधकार)

द्वारा भीष्म साहनी

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3m

भाषा

Hindi

रेटिंग

4.5

महत्व

Fiction

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तमस (अंधकार)
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तमस (अंधकार)
भीष्म साहनी
English Hinduism

तमस (अंधकार)

भीष्म साहनी
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Bhakti Yoga is a profound exploration of the path of devotion, presenting love, surrender, and spiritual discipline through the teachings of Swami Vivekananda.

इस पुस्तक के बारे में

तमस, जिसका अर्थ है अंधकार, एक शक्तिशाली और अडिग उपन्यास है जो 1947 में भारत के विभाजन की भयावह वास्तविकताओं पर प्रकाश डालता है। यह सांप्रदायिक बवंडर में फंसे साधारण लोगों की आंखों के माध्यम से है।

मुख्य अंतर्दृष्टि

क्या इंसानियत का सबसे गहरा अंधेरा बाहरी दंगों से आता है या उस ज़हरीली नफरत से जो एक इंसान को दूसरे के खिलाफ खड़ा कर देती है? भीष्म साहनी का उपन्यास “Tamas” इसी सवाल का एक ऐसा उत्तर है, जिसे पढ़कर रूह कांप जाती है।

यह कहानी उस दौर की है जब भारत के विभाजन की आग में इंसानियत जल रही थी। एक गरीब मजदूर नत्थू, जिसे अनजान में एक गलत काम के लिए मोहरा बनाया जाता है, और फिर शुरू होता है मौत का वह तांडव जो पूरे शहर को अपनी लपेट में ले लेता है।

मेरे ज़हन में एक दृश्य आज भी ताज़ा है। सूरज ढल रहा है, हवा में बारूद और धुएं की गंध घुली है। गलियों में सन्नाटा है, लेकिन वह सन्नाटा खामोश नहीं, बल्कि किसी बड़े तूफान के आने की आहट है। तभी नत्थू अपनी कोठरी में बैठा है। वहां की हवा भारी है, दीवारों पर लालटेन की लौ कांप रही है, मानो वह भी इस डर से भाग जाना चाहती हो। भीष्म साहनी लिखते हैं: “अंधेरा तो बाहर था ही, पर उससे कहीं गहरा अंधेरा तो लोगों के मन में घर कर गया था।”

वहाँ एक संवाद है जो झकझोर देता है। जब एक बूढ़ा आदमी पूछता है, “यह आग आखिर किसे जला रही है?” तो जवाब में सिर्फ खामोशी मिलती है—एक ऐसी खामोशी जो चीखने से भी ज्यादा शोर करती है। [medium pause]

“Tamas” केवल दंगों की कहानी नहीं है, यह उन राजनीतिक चालों और धार्मिक कट्टरता का पर्दाफाश है जो समाज को भीतर से खोखला कर देती है। साहनी की लेखनी का कमाल देखिए, वे शब्दों से तस्वीरें नहीं, बल्कि जख्म उकेरते हैं। [sigh] यह किताब हमें याद दिलाती है कि जब हम नफरत को चुनते हैं, तो सबसे पहले अपनी इंसानियत को खो देते हैं।

क्या हम इस अंधेरे से कभी उबर पाएंगे, या इतिहास के पन्नों में लिखी ये लपटें आज भी हमारे बीच मौजूद हैं? [long pause] इसका जवाब आपको “Tamas” के अंत में मिलेगा। इसे पढ़िए, ताकि हम कल की ऐसी किसी और तबाही को रोक सकें।

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